सागर
दुनिया रुपी सागर में बसा है कैसा धमचक्र न कोई आहट है न हलचल, बस चल रहा है जीवन चक्र | सिंधु की अकर्मण्यता को माना ढकता है प्रतिबिम्बित नूर पर अस्थिरता राहत का नहीं तूफ़ान का संकेत है ज़रूर | हर व्यक्ति घिरा है निरर्थक एक मायावी जाल में,….
दुनिया रुपी सागर में बसा है कैसा धमचक्र न कोई आहट है न हलचल, बस चल रहा है जीवन चक्र | सिंधु की अकर्मण्यता को माना ढकता है प्रतिबिम्बित नूर पर अस्थिरता राहत का नहीं तूफ़ान का संकेत है ज़रूर | हर व्यक्ति घिरा है निरर्थक एक मायावी जाल में,….
एक दिन जब व्याकुल हुआ मन, सोचा, आराम से बैठकर सोचूँ और खोजूँ कारण | विचलित…
सुबह की रोशनी अब अंधेरे-सी लगे दूर इससे भाग मैं नींद में छिप जाऊँ जल्दी जागती…
छोड़ आई थी जिन रास्तों को नजाने कैसे उनसे मुलाकात हो गई। कभी न मिलने का…
तू सारथी इस जीवन रथ का कदम तुझी को बढ़ाना है | उठ चल, न छोड़ हिम्मत को, तू खुद ही तेरा सहारा है | तू पंछी अपने गगन का किसके लिए तू बैठा है ? उड़ चल, न बाँध तू खुद को, आसमा ही तेरा आशियाना है | तू पानी अपनी नदी का किसके लिए तू ठहरा है ?….
कभी हम हंसने चले और आँसू बह गए, क्यों इतने दु:ख मिले, सोचते ही रह गए | पर ज़िंदगी…