प्यार क्या है ?

कभी-कभी सोचती हूँ – प्यार क्या है ..
क्या ये वो पंछी की आवाज़ है
जो मेरी सुबह को गुदगुदाती है
और मेरे कानों में
ताज़गी का एहसास घोल जाती है ।
क्या ये वो हवा है
जो मेरे गाल पे शरारत करके
दबे पाँव बह जाती है ।
ये सूरज कि वो रोशनी है
जो मुझे बीती रात का अँधेरा भुला
नए दिन का होसला दे जाती है ।
या फ़िर वो मीठी-सी मुस्कान है
जो खिले फूल को देखकर
चेहरे पे छा जाती है ।
क्या ये वो मोहब्बत है
जो एक दिल से दूसरे को मिलती है
कभी साथ हँसना सिखाती है
तो कभी रूलाती है
कभी परेशान करती है
तो कभी सहारा देती है ।
क्या ये वो अल्फ़ाज़ है
जो कोई खत लिखकर बयान करता है
जो किसी के दूर होते हुए भी
पास होने का सुकून देता है ।
या ये वो खामोशी है जो
कभी कुछ न कहकर भी
बहुत कुछ कह जाती है ।
क्या ये वो ममता है
जो अपने नन्हे शिशु कि ठिठोली पे
आहे भरती है
उसकी छोटी-सी खरोंच पे
आँसुओं की मलहम मलती है ।
क्या ये स्पर्श है उन नन्ही उंगलियों का
जो मेरे हाथ को अक्सर नींद में थाम लेती है ।
फ़िर मैं सोचती हूँ ,
कि मैं हर वक़्त प्यार के सागर में डूबी हुई हूँ
और प्रेम कि बारिश चारों ओर से मुझपर बरस रही है ।
मेरी साँसों में बहने वाला भाव ही प्यार है,
तुझसे मुझको जो जोड़ता, वो बंधन ही प्यार है,
जो मुझे उन्मुक्त उढ़ने देता है, वो आकाश ही प्यार है,
वो मोहब्बत भी प्यार है, ममता भी प्यार है,
वो मिलन भी प्यार है, तड़प भी प्यार है,
हँसना भी प्यार है, रोना भी प्यार है,
गुस्सा भी प्यार है, वो जलन भी प्यार है,
मैं भी प्यार हूँ, तू भी प्यार है,
सब कुछ ही प्यार है ।
सब कुछ ही प्यार है ।।








